Hysteria Disease: Do You know in hindi

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हिस्टीरिया क्या मानसिक बिमारी है?  hysteria

 

 हिस्टीरिया क्या मानसिक बिमारी है?   

What is hysteria?

  • आज बात करते हैं, एक बेहद ही रोचक बीमारी की, जिसका नाम है हिस्टीरिया (hysteria)I आप लोगों में से ज्यादातर लोगों ने इसका नाम सुना होगाI अक्सर दिमाग में आता रहता है कि, हिस्टीरिया (hysteria) क्या मानसिक बीमारी है ?
  • जी हाँ, hysteria एक प्रकार की मानसिक बीमारी है, जिसे मनोरोग विशेषज्ञ (साइकेट्रिस्ट) एवं मनोचिकित्सक (साइकोलाजिस्ट) “conversion disorder” के नाम से जानते हैंI 
  • पहले मै आपको यह समझाता हूँ कि,हिस्टीरिया होता क्या है? what is hysteria?  
  • प्राचीन काल में रोमन लोग, यह विश्वास करते थे कि, जब भी औरतों में अजीब से लक्षण आते हैं , जैसे बेहोशी हो जाती है, चक्कर आते हैं, साँस चढ़ने लगती है, तो औरतों के पेट की बच्चेदानी यानि गर्भाशय घूमने लगती है, जो कि एक भ्रम थाI 
  • रोमन भाषा में “घूमते बच्चेदानी” को हिस्टीरिया कहा जाता था, तभी से इस बीमारी का नाम “हिस्टीरिया” पड़ गयाI
  • उस समय यह माना जाता था कि, हिस्टीरिया  एक बीमारी है जो सिर्फ औरतों में होती है, पुरुषों में नहींI बाद में प्रख्यात   साइकोलाजिस्ट “सिगमंड फ्रायड” ने यह बताया कि ऐसा नहीं है, यह पुरुषों में भी हो सकता हैI 
  • वास्तव में यह नाम सही नहीं है, लेकिन यह नाम बहुत चलन में है, बहुत लोग जानते भी हैं, कुछ फ़िल्में भी इस पर बनी हैं, यही कारण है कि इस शब्द को लोग काफी उपयोग करते हैंI
  • मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लोग हमेशा इस बीमारी को कन्वर्जन  डिसऑर्डर (Conversion disorder) कहना पसंद करते हैंI
  • अब इसको “कन्वर्जन”  (conversion) क्यों कहते हैं, जैसे पानी बर्फ में और बर्फ पानी में बदलता है, या डॉलर रुपयों में या रूपया डॉलर में बदलता है, वैसे ही मानसिक तनाव शारीरिक लक्षणों में बदल जाता हैI
  • बेहोशी के दो ही कारण होते हैं सामान्य जन जीवन मेंI पहला कारण होता है, मिर्गी का दौरा और दूसरा कारण होता है चिंता और टेंशनI
  • जब मनमर्जी के मुताबिक काम नहीं होता, तो टेंशन आ जाती है, बेहोश हो जाते हैं, शरीर अकड़ जाता हैI 
  • ऐसा ज्यादातर स्कूल के बच्चों में, महिलाओं में, होता हैI शादियों के समय पर भी कुछ लोग बेहोश हो जाते हैंI 
  • यहाँ तक कि TV पर दिखाई जाने वाले रियलिटी शोज  में भी आपने देखा होगा  कि,जब वैसे नंबर नहीं मिलते जैसा प्रतिभागी उम्मीद कर रहा होता है, तो वो बेहोश हो जाता हैI
  • इन सबको आप नर्वस ब्रेकडाउन भी कह सकते हैंI जब हमारे हिसाब से चीजें नहीं होती, तो हम उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते, थोड़े टाइम के लिए हमारा फ्यूज उड़ जाता हैI
  • जब कोई  बेहोश हो जाता है तो सामने वाला आप से बात नहीं करेगा, वैसी लड़ाई नहीं करेगा जैसा हो रहा होगाI इसको प्राइमरी गेन (Primary Gain) कहतें हैंI 
  • इसका मतलब है कि मरीज़ के मन की मुराद पूरी हो गयी है, वैसे तो उसको सीधे (directly) बोलना चाहिए था,   लेकिन सिचुएशन ऐसी थी कि सामने वाला उस पर हावी हो जाता था, और वो बोल भी नहीं पाता थाI

केस-1 

  • चलिए कुछ केस लेते हैं तो इस बीमारी (hysteria) को समझने में आसानी होगीI
  • मान लीजिये, एक लड़की का रिश्ता आता है और वो किसी दुसरे से शादी करना चाहती है, तो वो लड़के के सामने बेहोश हो जाती है, तो क्या होगा लड़के वाले खुद ही रिश्ते के  लिए मना कर देंगेI
  • पहली बात, उसके मन की इच्छा पूरी हो गयी कि, मै इससे शादी नहीं करना चाहती थी, और दूसरी बात, अब घर वाले उसे डाटेंगे नहीं, बल्कि उसकी ज्यादा ही देखभाल करेगें, उसे डॉक्टर के पास ले जायेंगे, उसे समझाने की कोशिश करेंगें, अतिरिक्त (Extra) अटेंशन देने की कोशिश करेंगेI
  • जहाँ वो पहले अपने घर वालों से सीधे बोल देती, तो शायद उसे डाटा या मारा जाता, अब इस डर से बचने के लिए वो बेहोश हो जाती हैI अब उसके मन की बात पूरी हो गयी है, घर वाले भी सहानभूति दिखाने लगते हैंI
  • अब मरीज़ का यह, एक तरीके से बात कहने का तरीका हैI

केस-2

  • अब एक और मरीज़ की कहानी सुनाता हूँ, एक बार एक मरीज़ अपने गाँव से शहर आयी, उसके पति शहर में नौकरी करते थेI सुबह 9 बजे से शाम 8 बजे तक उनका काम रहता थाI 
  • रविवार के दिन घर के कामों में उनका समय निकल जाता थाI समय मिलता था, तो वो या तो आराम करते थे या टीवी देखते थेI एक दिन उनकी पत्नी बोली की, मेरी आखें ठीक से काम नहीं कर रही है. तो उनके पति केमिस्ट से दवा लेकर आये और आखों में डालने के लिए दे दियेI 
  • 5-6 दिन बाद पत्नी बोलो कि,मुझे आँख से कुछ दिख ही नहीं रहा हैI पति उनको हॉस्पिटल लेकर गए, चेकअप हुआI आँखें एकदम नार्मल थीI सभी रिपोर्ट्स एकदम ठीक थीI  कहने का मतलब है आँखे एकदम ठीक थीI
  • सच बात तो ये थी कि, वो दिल्ली देखना चाहती थीं, लोगों से मिलना चाहती थीं, लेकिन उनके पति उन्हें वो अटेंशन नहीं दे रहे थे, जो वो चाहती थींI 
  • अब जो अटेंशन बोलने, कहने से नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी बात कहने का यह तरीका निकाला कि, उनकी आँखों की रोशनी चली गयी है, अब उन्हें दिखाई नहीं देगाI
  • ऐसे कई टेस्ट हैं, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि शारीरिक परेशानी है, की नहीं हैI अब शारीरिक दिक्कत नहीं है, तो मानसिक परेशानी हैI
  • अब इसका इलाज यही था, कि उन्हें समय दिया जाये, उन्हें घुमाया जाये दिल्ली मेंI इसका फायदा भी मिला, धीरे धीरे उनके आँखों की रोशनी भी वापस आ गयीI




 What is hysteria?

                                                                          Hysteria in Hindi

केस-3

  • एक और केस लेते हैं , एक महिला जो अपने सास के कहने पर घर का पूरा काम करती थीI हर १५ दिन में उसके शरीर में कुछ होता था, और लगता था, कोई उनके शरीर में प्रवेश कर गया है, जिसे घर वाले डायन या चुड़ैल कहते थे, वो झाड़ू से सास को पीटने लगती थीI
  • अब मान लीजिये, वो सच में झाड़ू से अगर अपने सास को पीटे तो, तो उनके पति भी उनकी पिटाई करेंगे, सास तो करेंगे हीI
  • घरवालों के अनुसार इसमें चुड़ैल की ही गलती है, उस लड़की की कोई गलती नहीं है, अब कारण अगर चुड़ैल है,  तो उसे ही ठीक करना पड़ेगा, आप जानते हैं कि अब घर वाले क्या करेंगे , मुझे ये बताने की जरूरत नहीं हैI
  • इस औरत के मन की मुराद भी पूरी हो गई सास को पीटने से, उसके बाद डर की वजह से ज्यादा काम भी नहीं दिया सास ने I
  • अब इस केस में घर वालो को समझाना थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि ये है तो, साइकोलॉजिकल केसI अगर सास ज्यादा काम करने के लिए न कहे, और खुद भी मदद करे तो ये ये लक्षण धीरे-धीरे  अपने-आप ख़त्म हो जायेंगेI
  • अब अपने आप से पूँछिये की, क्या ये संभव है?

केस-4

  • एक और केस  लेते हैं, बुजर्गों में अक्सर आपने देखा होगा कि, कई लक्षण लगातार आते रहते हैं, जैसे साँस में लगातार आवाज़ आना, आँखे बंद करना, फिर अपने आप खोल देना, डकार, हिचकियाँ हर समय आते रहना इत्यादिI
  • ऐसे मरीजों को समझाना भी बहुत आसान नहीं रहता, घर वालों को बताना पड़ता है कि, अब ये रिटायर हो गएँ हैं, इन्हें अटेंशन नहीं मिल  पा रहा है, जैसे पहले मिलता थाI 
  • अब यह बीमारी ही इनका सहारा बन गया हैI चाहे कितनी भी जांचे करा लें, कुछ निकलता नहीं हैI 
  • वो मात्र एक लक्षण होता है, जिसकी वजह से लोग उन पर ध्यान देते हैं, जब वो अटेंशन नहीं मिलता तो कुछ और लक्षण पैदा हो जाते  हैं और ये लक्षण लगातार बदलते रहते हैंI

हिस्टीरिया (hysteria) को मिर्गी के दौरे बिलकुल नहीं समझना चाहिएI

  • मिर्गी  के दौरे में जीभ कट  जाती है, झटके लगते  हैं, बेहोशी आती हैI हिस्टीरिया में दांत भीच जाते हैं, मुठियाँ बंध जाती हैं, आखें ऊपर चढ़ जाती हैं, मानो कोई अन्दर ही आ गया हैI लोग गिर जाते हैं, लेकिन चोट नहीं लगती, घंटों तक बेहोश रहते हैंI
  • जबकि मिर्गी का दौरा आता है, तो सच में दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, सामान्यतः दौरा 2 से 3 मिनट तक का होता हैI  
  • अगर सही में दौरा 15 से 30  मिनट हो जाये, तो  सही में जान का खतरा हो जाता है, जिसे हम स्टेटस एपिलेप्टकिस (Status epilepticus)  कहते हैंI
  • अगर मरीज़ कभी भी 1 घंटे तक बेहोश रहे और उसे समझ आ रहा हो की, उसके आस पास क्या हो रहा है, वो कुछ महसूस भी कर पा रहा है, तो इसका मतलब है उसे मिर्गी नहीं, हिस्टीरिया की परेशानी हैI
  • जितने भी केस मैंने बताये हैं, मै यहाँ जरूर बताना चाहूँगा कि इसमें मरीज़ तनाव की वजह से ये लक्षण प्रदर्शित करता हैI उसका अवचेतन मन (unconscious mind), उससे यह काम करवाता हैI  
  • इसके इलाज के लिए वास्तव में हमें दवाओं की भी जरूरत नहो है ,दवाएं सिर्फ बेचैनी और घबराहट कम करने के लिए दी जाती हैंI
  • सिर्फ ये देखना है की, मानसिक तनाव किस प्रकार का है, उसे पता करने की जरूरत हैI
  • आखिर में एक और  रोचक केस के बारे में सुनाता हूँ, एक महिला थी, वो काफी अच्छे घर से थी, जब शादी के 3 साल हो गए तो उन्हें लगातार चक्कर और बेहोशी आने लगीI घर वाले परेशान हो गयेI 
  • जानकारी करने पर पता चला कि डेढ़ साल पहले, उनके पति के पास उनके एक्स गर्लफ्रेंड  का फ़ोन आया था,  तभी से उनको ये परेशानियाँ हो रही थी, वो असुरक्षित (Insecure) महसूस करने लगी थींI
  • क्योंकि ससुराल वाले काफी प्रभावी लोग थे, तो वो अपनी बात को रख नहीं पा रही थी, अब जब भी उसको टेंशन थी तो वो बेहोश हो जाती थीI
हिस्टीरिया क्या मानसिक बिमारी है?  What is hysteria?

 

  • इस तरह के अनगिनत केस हैं, जिनमे इस तरह की परेशानियाँ होती हैI पर घर वाले इस बात को अपने ईगो पर ले लेते हैं कि और वो मानने को तैयार ही नहीं होते कि हमारे मरीज़ को शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक परेशानी है और इसे एक मनोचिकित्सक (साइकेट्रिस्ट) की जरूरत हैI
  • जब हम ये लक्षण पहचान लेते हैं, समझ लेते हैं और इनका हल निकाल लेते हैं तो मरीज़ के ये लक्षण अचानक ही खत्म होने लगते हैंI
  • यह (hysteria) बहुत ही कॉमन परेशानी है, बहुत ज्यादा इसके मरीज़ आते हैं, फालतू की जांचें होती हैं, बहुत सी diagnosis बनती हैं. जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं होती हैI
  • अगर हम समझें , मरीज़ को मौका दें अपनी बात कहने का,उनकी परेशानियों को समझने का, तो अक्सर ऐसा होता हैकि 90 प्रतिशत  मरीज़ 1 महीने में ठीक हो जाते हैं, लेकिन  कुछ केस सालो- साल चलते रहते हैंI
  • जब घर वाले नहीं समझते हैं, कुछ ज्यादा ही ध्यान (over-attention) देते हैं, तो बच्चे,बूढ़े, जवान ,महिलायें या जो कोई भी हो, और ज्यादा लक्षण पैदा करने लगता हैI 
  • एक तरह की साइकिल सी बन जाती है, जिसे तोड़ना (ब्रेक) बहुत जरूरी हो जाता हैI
  • इस बीमारी (hysteria) का इलाज है कि,  इसको  दूसरे फायदे (सेकेंडरी गेन) तक पहुचने ही नहीं दिया जाय, यानि जो पेशेंट को बीमारी से फायदा हों रहा है, वो होने ही नहीं दिया जायेI
  • अगर ऐसा होता है तो मरीज़ ये लक्षण पैदा ही नहीं कर पायेगाI
  • यह इलाज तो है मानसिक तनाव हटाने का, काफी फायदा भी होता है , लेकिन धैर्य की जरूरत होती है, वैसे और भी तरीके है जिनकी चर्चा फिर कभी करेंगेंI
  • आशा है की इस ब्लॉग से हिस्टीरिया (hysteria) क्या मानसिक बीमारी है ?” इस टॉपिक को ठीक से समझने में आपको जरूर मदद मिली होगी I

अच्छा लगा हो तो कमेंट जरूर कीजियेगाI
                                                                 धन्यवाद्

            

 
 

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